नई दिल्ली, अप्रैल 20 -- वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान ने देवताओं को अमृत पिलाने के लिए और राहु को अमृत पिलाने से बचाने के लिए मोहिनी रुप धरा था। जिसके बाद राहु और केतु अमृत पी नहीं पाएं और छल से सभी देवताओं को अमृत पिला दिया। सभी पापों को क्षय करके इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। ये एकादशी व्रत सतयुग से चला आ रहा है। इस व्रत को सतयुग में कौटिन्य मुनि ने इस व्रत के बारे में शिकारी को बताया था, फिर द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत के बारे में बताया। तब से मोहिनी एकादशी व्रत चला आ रहा है।इसके बाद त्रेतायुग में महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम को इस व्रत का महत्व बताया । इस साल व्रत 27 अप्रैल को रखा जाएगा। कैसे करें पूजा मोहिनी एकादशी की पूजा एकादशी के दिन सबसे पहले सूर...