मेरठ, जुलाई 20 -- Meerut News: आर्य समाज थापरनगर में रविवार को सत्संग में 'क्या है जीवन का परम लक्ष्य' पर ज्वालापुर (हरिद्वार) से पधारे आचार्य शैलेश मुनि सत्यार्थी ने प्रवचन में जीवन के अर्थ का महत्व समझाया। कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को इसका सदुपयोग करते हुए श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए, ताकि अगला जन्म भी श्रेष्ठ हो और जीवन के परम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति हो सके। शैलेश मुनि ने कहा कि मोक्ष प्राप्ति के लिए ज्ञान, कर्म और उपासना का पवित्र एवं शुद्ध होना आवश्यक है। मनुष्य को मानव निर्मित प्रतिमाओं के बजाय ईश्वर द्वारा निर्मित जीवंत मूर्तियों, माता, पिता और आचार्य की सेवा करनी चाहिए। यह भी पढ़ें- भक्ति के बिना ज्ञान और वैराग्य अधूरे हैं अज्ञान रूपी अंधकार जीवन की सबसे बड़ी बाधा है, जिससे बाहर निकलने के लिए वेद ज्ञान...