मऊ, नवम्बर 1 -- Mau News: मऊ, संवाददाता। त्योहारों पर मिलावटखोरी रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी और नमूना संग्रह की कार्रवाई तो खूब होती है, लेकिन इन नमूनों की जांच जिले में नहीं हो पाती। वजह यह है कि जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता परखने के लिए अपनी प्रयोगशाला तक नहीं है। विभाग की टीमें दूध, मावा, पनीर, घी और मिठाइयों के नमूने लेकर दूसरे जिलों की प्रयोगशालाओं के भरोसे रहती हैं। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी और मेरठ से जांच रिपोर्ट आने में एक महीने या उससे अधिक का समय लग जाता है। यानी जिस मिठाई में मिलावट की आशंका पर नमूना लिया जाता है, उसकी रिपोर्ट आने तक त्योहार बीत जाता है और वह खाद्य सामग्री बाजार से खप भी चुकी होती है। ऐसे में सवाल है कि देरी से मिलने वाली जांच रिपोर्ट के आधार पर मिलावटखोरों पर समय रहते शिकंजा कैसे क...