मैनपुरी, अगस्त 4 -- Mainpuri News: नगर के प्राचीन श्री भीमसेन जी महाराज मंदिर में श्रावण मास महोत्सव में श्रीरामचरित मानस कथा छठवें दिन आचार्य शशिकांत तिवारी रामायणी ने चित्रकूट के पावन प्रसंग का रसपान कराया। आचार्य ने कहा कि चित्रकूट का प्रवास श्रीराम के वनवास का केवल एक अध्याय नहीं, अपितु धर्म, त्याग, करुणा और भ्रातृ-प्रेम का अमर आलोक है। उन्होंने बताया कि जब श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण चित्रकूट की पावन वसुंधरा पर निवास कर रहे थे, तभी अयोध्या से भरत समस्त सभासदों, गुरुओं तथा माताओं सहित वहां पहुंचे। उनका उद्देश्य राज्य पाना नहीं था, बल्कि अपने आराध्य भ्राता को पुनः अयोध्या के सिंहासन पर प्रतिष्ठित करना था। उस क्षण चित्रकूट की पर्वतमालाएं, मंदाकिनी का निर्मल प्रवाह और वन की प्रत्येक लता इस दिव्य मिलन की साक्षी बनी।

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