लखनऊ, अक्टूबर 10 -- Lucknow News: समाज कल्याण विभाग ने विभागीय जांचों को जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए नए मापदंड जारी किए गए हैं। अब आरोपी कर्मचारियों, अधिकारियों को भी लिखित और मौखिक बयान, बहस का मौका दिया जाएगा। पक्ष सुनने के बाद आरोपों का स्पष्ट निर्धारण और दंड की सिफारिश करनी होगी। जांच के नाम पर लीपापोती नहीं चल पाएगी।

जांच प्रक्रिया में जवाबदेही ऐसा इसलिए करना पड़ा कि कई कोर्टों से आरोपियों को इसलिए राहत मिल गई कि उनका पक्ष सुना नहीं गया। तथ्यों के आधार पर आरोप निर्धारित किए गए और दंड की सिफारिश की है। समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव प्रवीण मिश्र ने इसको लेकर दिशा-निर्देश जारी किया है। उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के नियम-7 के तहत होने वाली विभागीय जांचों के लिए मानकीकृत प्रारूप और 10 बिंदुओं की अनिव...