लखनऊ, जुलाई 28 -- Lucknow News: अनिल तिवारी, संवाददाता, अम्बेडकरनगर । भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव विशेष सम्मान दिया गया है। हिन्दू धर्म में तो गुरु का स्थान देवताओं से भी ऊंचा माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि माता-पिता जन्म देकर शरीर की रचना करते हैं, परंतु गुरु ज्ञान देकर जीवन को सही दिशा और अर्थ प्रदान करते हैं। यही कारण है कि इस सांसारिक भवसागर को पार करने में मनुष्य को केवल गुरु ही सच्ची राह दिखा सकते हैं। गुरु के ज्ञान, उपदेश और आशीर्वाद पर चलकर ही शिष्य जीवन की कठिनाइयों से पार पाकर मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। सदियों से चली आ रही इस गुरु-शिष्य परंपरा में शिष्य अपने गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण, श्रद्धा और विश्वास रखते हुए उनके बताए मार्ग पर चलता है, वहीं गुरु भी अपने ज्ञान और अनुभव से शिष्य का मार्गदर्शन कर उसे सही राह ...