लखनऊ, जुलाई 6 -- Lucknow News: लखनऊ , कार्यालय संवाददाता घर घर में तजकिरा है शहे तशनाकाम का, दसवां है आज आपके बेकस इमाम का, बच्चे भी रो रहे हैं कि असगर हुए शहीद, बेताब नौ-जवां है कि अकबर हुए शहीद। हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों को यजीद की फौज ने तीन दिन का भूखा-प्यासा शहीद कर दिया था। मोहर्रम माह के अनुसार सोमवार को इनकी शहादत को दस दिन हो गये हैं। इन्हीं शहीदों की याद में अजादारों ने सोमवार को हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों को याद करके दसवां मनाया। इस मौके पर घरों में बुजुर्गों ने नज्र दी उसके बाद परिवार के लोगों ने इसे चखा और इमाम के गम में आंसू बहाये। वहीं महिलाओं ने घरों में इमाम के दसवें तारीखी नौहा पढा़ कि बैन करती थी जैनब यह रो कर, मेरे भाई का दसवां हो क्यों कर, फातेहा किस तरह दे यह ख्वाहर मेरे भाई का दसवां हो क्यो कर। पुराने शहर...