संदीप जैन, मार्च 27 -- एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और बढ़ी कीमतों ने गांव-कस्बों में घरों की रसोई में पुराने दिनों की याद दिला दी है। वहां अब लोग मजबूरी में पारंपरिक मिट्टी के चूल्हों पर खाना पका रहे हैं। धुएं वाली रसोई वापस लौट आई है। हालांकि यह रसोई रियायती और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी साबित हो रही है। आगरा में पिनाहट के बीहड़ का गांव क्योरी बीच का पुरा हो या फिर जयपुर हाइवे स्थित नगला कुर्रा (महुअर)। घरेलू गैस न मिलने के कारण चूल्हों पर खाना पकाना मजबूरी बन गया है। इंडक्शन चूल्हे बाजार में मिल नहीं रहे हैं। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी-उपले ही एकमात्र सहारा हैं। घरों में पुराने दिनों की याद ताजा हो गयी है। एक दौर था जब घर-घर में लकड़ी और उपलों वाले मिट्टी के चूल्हे जलते थे।चूल्हे पर खाना पकाने के ये हैं फायदे मिट्टी के चूल्हे मुख्...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.