Lalitpur News: दिहाड़ी मजदूर बनकर रह गए हथकरघा कारीगर
ललितपुर, अगस्त 6 -- Lalitpur News: ललितपुर। एक जनपद एक उत्पाद स्कीम में शामिल जरी सिल्क साड़ी की चमक भले ही मंचों पर सभी को चकाचौंध करती हो लेकिन इसको बनाने वाले कारीगरों की आमदनी दिहाड़ी मजदूरों से अधिक नहीं हैं। आठ से दस घंटे की मेहनत के बाद वह चार से आठ सौ रुपये कमा पाते हैं, जिससे परिवार का पेट भर पाना संभव नहीं है। बुंदेलखंड स्थित ललितपुर जनपद मध्य प्रदेश की प्राचीन नगरी चंदेरी से सटा हुआ है। वहां बड़े पैमाने पर सिल्क साड़ियों का कारोबार होता है। इसी के चलते ललितपुर में भी कई दशकों से जरी सिल्क साड़ी बनाई जा रही हैं। यहां लगभग चार सौ परिवार जरी सिल्क साड़ी बनाने के कारोबार से जुड़े हैं। शहर में नेहरू नगर, चांदमारी और नई बस्ती में यह लोग घरों के भीतर लूम लगाकर साड़ियां बनाते हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों में बुढ़वार, मड़वारी, सीरोनखुर्द, सीरोनकलां औ...
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