लखीसराय, अक्टूबर 24 -- Lakhisarai News: अजय कुमार, लखीसराय। जब योजना का फीता काटना हो तो बड़े बड़े साहब चमचमाती गाड़ियों से उतरते हैं फोटो खिंचती है अखबारों में सुर्खियां बनती है। लेकिन जब वही योजना दम तोड़ने लगती है तो सारे साहब अपनी आंखों पर पट्टी और कानों में रुई ठूंस लेते हैं। जिले के सदर अस्पताल का नजारा देखकर यह कहावत सौ फीसदी सच साबित होती है। महिलाओं को माहवारी के दौरान संक्रमण से बचाने और उन्हें महज दो रुपये में सुरक्षित सैनिटरी नैपकिन देने का ढोल पीटकर जिस वेंडिंग मशीन को स्थापित किया गया था वह आज चार साल बाद अस्पताल के गलियारे में एक बेजान कबाड़ और सरकारी नाकामी का स्मारक बनकर लटकी हुई है। ----

दो रुपये की मशीन और चार साल की बदहाली 2 रुपये के सिक्के की जो सिस्टम के दीमक की भेंट चढ़ गया: ​आज से ठीक चार साल पहले तत्कालीन जिला अधि...