नई दिल्ली, सितम्बर 4 -- जन्माष्टमी पर नाल छेदन की परंपरा बहुत ही पुरानी है। आज रात कृष्ण जन्मोत्सव की विधि के दौरान नाल छेदन किया जाएगा। घरों में सुबह से ही पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लोग लड्डू गोपाल के लिए झूला सजाते हैं। तो वहीं कुछ लोग माखन-मिश्री, पंजीरी और बाकी भोग बनाते हैं। जन्माष्टमी की पूजा में डंठल वाले खीरे का बहुत ही महत्व होता है। रात में पूजा के वक्त खीरे से डंठल को अलग करने की प्रक्रिया को ही नाल छेदन कहा जाता है। इस प्रक्रिया को भगवान कृष्ण के जन्म से जोड़कर देखा जाता है। जानें कि पूजा के दौरान खीरे को किस तरह से काटना है और नाल छेदन की सही विधि क्या है?पूजा के लिए लाएं ऐसा खीरा आज की पूजा के लिए आप ऐसा खीरा ही लाएं जिस पर डंठल लगा हो। कोशिश करें कि खीरा ताजा और साफ हो। आज के दिन बिना डंठल वाला खीरा ना लेकर आएं। प...