कोडरमा, सितम्बर 24 -- Kodarma News: झुमरी तिलैया, निज प्रतिनिधि। जैन धर्म का सर्वोच्च पर्व दसलक्षण पर्यूषण का नवम दिन गुरुवार को जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम आकिंचन धर्म के रूप में मनाया। इस अवसर पर जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन हुआ। जैन मुनि श्री 108 सुयश सागर गुरुदेव ने प्रवचन में आकिंचन धर्म का आध्यात्मिक महत्व बताया। मुनि सुयश सागर ने कहा कि ''किंचित भी मेरा नहीं है, दुनिया का कोई भी पदार्थ मेरा नहीं है'' ऐसा मानना और जानना ही आकिंचन धर्म है। जो बाहर और भीतर से एक हो, वहीं आकिंचन धर्म खिलता है। उन्होंने कहा कि जिस धर्म से परमात्मा का रहस्य प्रकट होता है, वह आकिंचन धर्म है। दुनिया में वही स्वस्थ है, जो निर्विकल्प और निराकुल है। अर्थी सजने के पहले जीवन के अर्थ को समझना जरूरी है, अन्यथा अनर्थ हो जाता है। य...