किशनगंज, अक्टूबर 12 -- Kishanganj News: किशनगंज, निज संवाददाता। बचपन में दिखाई देने वाली जन्मजात शारीरिक विकृति केवल बच्चे के शरीर को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि उसके पोषण, विकास, आत्मविश्वास और भविष्य की संभावनाओं पर भी असर डाल सकती है। क्लबफुट यानी जन्मजात टेढ़े पैर की समस्या में समय पर उपचार नहीं मिलने से बच्चे को चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। वहीं, कटे होंठ और कटे तालू के कारण दूध पीने, पोषण तथा बोलने में कठिनाई हो सकती है। टंग-टाई की स्थिति में भी कुछ बच्चों को जीभ की गति और बोलने से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक तंगी और जानकारी का अभाव इन परेशानियों को और बढ़ा देते हैं। ऐसे में जरूरी है कि बीमारी की पहचान शुरुआती अवस्था में हो और परिवार को उपचार के लिए भटकना न पड़े। इसी उद्देश्य से बिहार सरकार राष्ट्रीय बाल स्वास...