नई दिल्ली, अप्रैल 25 -- उत्तराखंड की पावन भूमि देवताओं का निवास स्थल मानी जाती है। यहां के प्राचीन मंदिर और रहस्यमय स्थान भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव कराते हैं। चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालु एक अनोखे स्थल के बारे में जरूर सुनते हैं - रेतस कुंड। केदारनाथ मंदिर से मात्र 500 मीटर दूर सरस्वती नदी के तट पर स्थित यह कुंड अपनी चमत्कारिक विशेषता के लिए प्रसिद्ध रहा है। हालांकि, 2013 की भयावह आपदा में यह कुंड लुप्त हो गया, फिर भी इसके प्रति भक्तों की आस्था आज भी अटूट है।रेतस कुंड की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रेतस कुंड का निर्माण देवी रति के आंसुओं से हुआ था। जब भगवान कामदेव भगवान शिव के क्रोध से भस्म हो गए, तो उनकी पत्नी रति शोक में व्याकुल होकर रोती रहीं। उनके आंसुओं का फव्वारा इसी स्थान पर गिरा, जिससे य...