कानपुर, अक्टूबर 6 -- Kanpur News: कानपुर, प्रमुख संवाददाता। बड़ा वही है, जो सबको बड़प्पन प्रदान करे। हनुमान जी ने भगवान श्री राम के आदर्शों को अपनी लीला में चरितार्थ किया। श्री रामकथा के आठवें दिन यह प्रसंग दीदी मां मंदाकिनी श्रीराम किंकर ने सुनाया। कथा मर्चेंट चेंबर में चल रही है। कथा के क्रम में दीदी मां मंदाकिनी श्रीराम किंकर ने कहा कि धर्म रथ के सजीव विग्रह हनुमान जी ने शक्ति, भक्ति, शांति और लक्ष्मी स्वरूपा सीता माता की अन्वेषण यात्रा में मिलने वाली तीन नारियों से अलग-अलग व्यवहार किया। सुरसा के मुंह मे अति लघु रूप धरकर विजय प्राप्त कर ली। ईर्ष्या रूपी सिंघिका का संहार किया। जबकि, लंकिनी के सिर पर मुक्के से प्रहार कर उनकी धारणा बदल दी। व्यक्ति में गुण होना ही यथेष्ट नहीं है। सदगुण का संयमन, संयोजन और संतुलन स्थापित करना भी एक कला है। ...