कानपुर, सितम्बर 11 -- Kanpur News: कानपुर, प्रमुख संवाददाता। जिस उम्र में हाथों में किताबें और कंधों पर स्कूल बैग होना चाहिए, उस उम्र में एक बच्चा अस्पताल के बिस्तर के पास खड़ा होकर पिता की सांसों का ख्याल रख रहा है और दूसरा 12 घंटे फैक्ट्री में पसीना बहाकर घर की रोटी जुटा रहा है। मां पहले से बिस्तर पर हैं, पिता हादसे के बाद जिंदगी और दर्द के बीच जूझ रहे हैं। पनकी निवासी अजय तिवारी के उस परिवार की, जहां बीमारी ने सिर्फ माता-पिता को नहीं, बच्चों के सपनों को भी बिस्तर पर डाल दिया। चार महीने पहले 48 साल के अजय तिवारी गोरखपुर में पैतृक गांव गए थे। रात में छत से गिर पड़े और गंभीर चोट के बावजूद पूरी रात वहीं पड़े रहे। صبح परिवार उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया। कमर और गर्दन की हड्डियों में गंभीर चोट थी। वहां से कुछ दिन बाद लखनऊ और फिर क...