नई दिल्ली, जुलाई 1 -- हर साल आईआईटी से इंजीनियरिंग करने का ख्वाब लिए करीब 13 से 14 लाख विद्यार्थी जेईई का एग्जाम देते हैं। लेकिन सीटें बेहद कम होने के चलते अधिकांश के हाथ मायूसी ही लगती है। जेईई मेन या एडवांस्ड में खराब रिजल्ट के चलते निराश छात्र छात्राओं के लिए आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर वी. कामकोटी की कहानी काफी सीख देने वाली है। वी. कामकोटी के संघर्ष की यात्रा बताती है कि एक परीक्षा में मिली असफलता कभी भी किसी व्यक्ति का भविष्य तय नहीं करती। भारत के सबसे प्रतिष्ठित और नंबर 1 (भारत सरकार की एनआईआरएफ रैंकिंग के मुताबिक) इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी मद्रास का नेतृत्व करने और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE) के चेयरमैन बनने से काफी पहले कामाकोटी भी एक ऐसे छात्र थे जो असफलता का सामना कर रहे थे। उन्हें केमिस्ट्री में सिर्...