नई दिल्ली, सितम्बर 2 -- भाद्रपद मास में कंस के कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। अंधेरी बारिश वाली रात में कान्हा रोहिणी नक्षत्र में जन्मे थे। कहा जाता है कि जन्माष्टमी का महोत्सव अच्छे से मनाना चाहिए, यहां तक की श्रीहरि के सभी उत्सवों को हर्षोल्लास से मनाना चाहिए। वराह पुराण में इस बात का जिक्र है कि श्रीहरि के सभी उत्सवों को प्रेम और हर्षोउल्लास के साथ मनाना चाहिए। इस दिन इस दिन स्नान करके पीले वस्त्र पहनें, इस दिन दूसरे रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। घर के मंदिर को साफ करें। गंगाजल छिड़क कर मंदिर को साफ करना चाहिए। रंग बिरंगे फूलों से मंदिर को सजाएं। भगवान की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं। रात को पूजा में खीरा जरूर रखें। जन्माष्टमी की रात कान्हा जी के जन्म पर खीरा काटने की परंपरा है, इसे गर्भनाल से जोड़कर देखा जाता है। इसके लिए...