नई दिल्ली, मई 3 -- हिंदू धर्म में दान को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि सही समय, सही वस्तु और सही व्यक्ति को दिया गया दान ना सिर्फ पुण्य बढ़ाता है, बल्कि कई जन्मों तक फल देता है। दान मात्र धन देने का कार्य नहीं है, बल्कि यह मन की शुद्धता, त्याग और परोपकार की भावना का प्रतीक है। सनातन परंपरा में पूजा, व्रत या किसी मांगलिक कार्य के बाद दान अवश्य करना चाहिए, ताकि कर्म का फल शुभ हो।दान का महत्व और पुण्य दान करने से व्यक्ति के पाप कम होते हैं और सुख-समृद्धि बढ़ती है। शास्त्र कहते हैं कि न्यायपूर्वक कमाए गए धन का दसवां हिस्सा दान करना चाहिए। ऐसा दान ईश्वर को प्रसन्न करता है। दान न केवल दाता को पुण्य दिलाता है, बल्कि लेने वाले की भी मदद करता है। लेकिन दान बिना सही नियमों के करने पर उल्टा प्रभाव भी पड़ सकता है। इसलिए दान ...