हापुड़, अगस्त 18 -- Hapur News: नगर के छोटे बाजार आयोजित संगीतमयी श्री राम कथा के पांचवें दिन मंगलवार को प्रभु श्री राम के वनवास कथा का वर्णन हुआ। जहां श्री राम के राज तिलक से वनवास तक की कथा सुनायी सुनाई गई। कथा वाचक रोहित शास्त्री ने कहा कि प्रभु श्री राम दशरथ के चार पुत्र में सबसे बड़े पुत्र थे। श्री राम अपने पिता की हर बातों का पालन करते थे। चारों भाइयों में सबसे बड़े होने के नाते राम को राजपाठ का भी बहुत ज्ञान था। हर समय अपने पिता दशरथ का हाथ बंटाते थे। जैसे-जैसे प्रभु राम बड़े हुए तो दशरथ के मन में एक ही बात थी, कि मैं अपने जीते-जीते राम को आयोध्या का राजा बना कर राज तिलक कर दूं। राजा दशरथ ने अपने राज्य में युवराज राम को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।पूरी आयोध्या नगरी प्रभु श्री राम के राज तिलक को उतावली थी। इसी बीच माता कैकई ने राजा...