आर एन त्रिपाठी, मार्च 31 -- शक्ति और ज्ञान का प्रदर्शन नहीं, उसे पचा जाने की अदम्य क्षमता का नाम है- हनुमान। सर्वशक्तिमान होकर भी विनीत भाव से श्रीराम के सेवक होने का गौरव लिए हनुमान यही सीख देते हैं कि शक्ति और ज्ञान का अहंकारपूर्ण प्रदर्शन न हो। उसमें केवल सात्विकता और लोक कल्याण का भाव हो। इस साल हनुमान जन्मोत्सव 2 अप्रैल को मनाया जा रहा है।हनुमान जी का बालपक्ष हनुमान ज्ञानियों में अग्रगण्य अर्थात सबसे ऊपर हैं। भक्ति से आशय शील, संयम भरा जीवन और कर्म अर्थात व्यक्ति के जीवन का क्रियापक्ष, यदि तीनों का समन्वय और प्रेरणा पुंज कोई है, तो वह हनुमान हैं। उनके बालपक्ष को देखिए, वे अपने बाल रूप में ही सूर्य को फल समझ कर निगलने का प्रयास करते हैं, जो उनका असीम शक्तिमान व अतीव जिज्ञासु होने की कथा भर नहीं है। यह समाज को भी संदेश है कि वह अपने बा...
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