हमीरपुर, सितम्बर 9 -- Hamirpur News: राठ, संवाददाता। माता-पिता को कष्ट देने के कारण धुंधकारी को प्रेत योनि की प्राप्ति हुई। गया में श्राद्ध के बाद भी उसका उद्धार नहीं हो सका। जिसके बाद भागवत कथा के अनुष्ठान से उसे प्रेति योनि से मुक्ति मिली। श्री मेला जलविहार समिति के तत्वाधान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास उत्तम कृष्ण शास्त्री द्वारा धुंधकारी उपाख्यान के माध्यम से बताया कि धुंधकारी अपने कर्मों के कारण भयंकर प्रेत योनि को प्राप्त हुआ। श्री गोकर्ण महाराज ने धुंधकारी का गया में श्राद्ध कर दिया। इसके बाद भी धुंधकारी का उद्धार नहीं हुआ क्योंकि जो व्यक्ति अपने भगवत स्वरूप माता-पिता को कष्ट देता है दूसरे के प्रति द्वेष भाव रखता है ऐसे व्यक्ति का किसी भी प्रकार से उद्धार नहीं हो सकता। अत: मनुष्य को चाहिए कि वह अपने माता-पिता...