हमीरपुर, सितम्बर 6 -- Hamirpur News: भरुआ सुमेरपुर, संवाददाता। कस्बे का ऐतिहासिक तीजा मेला अपने अंदर तमाम परंपराओं को आज भी सहेजे हुए हैं। लोग आज भी इन परंपराओं का निर्वाहन करके उनको जीवंत किए हुए हैं। परंपरा है कि जो बहाने रक्षाबंधन में मायके आकर भाइयों की कलाइयों में राखी बांधने से वंचित हो जाती हैं। वह तीजा महोत्सव में आकर भाइयों को राखी बांधती है। इसके अलावा महोत्सव में जब घर-घर नाते रिश्तेदारों का जमावड़ा लगता है। तब शादी ब्याह के रिश्ते भी तय होते हैं। कस्बा निवासी बुजुर्ग रामअवतार, मैयादीन, स्वामीदीन, कालीचरण, आशाराम, दातादीन, श्यामलाल, रामबिहारी, सुदामा प्रसाद, कामता वर्मा, रामनारायण आदि बताते हैं कि वह जिंदगी के 80 से अधिक बसंत देख चुके हैं। यह भी पढ़ें- Rishikesh News: सांस्कृतिक परंपराओं, नारी शक्ति, पारिवारिक प्रेम का प्रतीक है...