ओशो, जुलाई 28 -- घर बैठे गुरु नहीं मिलते। इसके लिए यात्रा करनी पड़ती है। इस यात्रा में बहुत कुछ छूटता है और बहुत कुछ जुड़ता है। एक योग्य शिष्य सच्चे गुरु को खोज ही लेता है, इसलिए एक शिष्य का योग्य होना बहुत जरूरी है।लोग मुझसे आकर पूछते हैं कि असली गुरु का कैसे पता चले? मैं उनको कहता हूं, तुम फिक्र न करो। अगर तुम असली शिष्य हो, तो पता चल जाएगा। नकली गुरु तुमसे बचेगा, भागेगा कि यह चला आ रहा है असली शिष्य, यह झंझट खड़ा करेगा। तुम गुरु की फिक्र ही छोड़ दो। असली शिष्य अगर तुम हो, तो नकली गुरु तुम्हारे पास टिकेगा ही नहीं। तुम टिके रहना, वही भाग जाएगा।शिष्यों की तलाश जिब्रान की कहानी है कि एक आदमी गांव-गांव कहता फिरता था कि मुझे स्वर्ग का पता है, जिनको आना हो मेरे साथ आ जाओ। कोई आता नहीं था, क्योंकि लोगों के पास हजार दूसरे काम हैं, स्वर्ग जाने की ...