गिरडीह, अक्टूबर 11 -- Gridih News: सियाटांड़, प्रतिनिधि। आस्था की जड़ें जब परंपरा से जुड़ती हैं, तो वह केवल पूजा नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति की धरोहर बन जाती है। नवडीहा की दुर्गा पूजा इसकी जीवंत मिसाल है। यहां मां दुर्गा की आराधना की परंपरा वर्ष 1814 से चली आ रही है। ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में टिकैत महोपत नारायण सिंह ने मां के मंदिर की स्थापना कर पूजा की शुरुआत की थी। करीब 212 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरे श्रद्धाभाव और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। माता के डाक की 2050 तक है बुकिंग : नवडीहा माता रानी की महिमा इतनी न्यारी है कि यहां डाक चढ़ाने के लिए आगामी 2050 तक बुकिंग चल रही है। इस वर्ष जिप अध्यक्ष मुनिया देवी के देवर खुट्टाबांध निवासी मनोज वर्मा द्वारा माता की सेवा में डाक अर्पित किया गया है और माता की प्रतिमा बनवा...