गिरडीह, अक्टूबर 27 -- Gridih News: पीरटांड़, प्रतिनिधि। मधुबन स्थित गुणायतन में साधनारत राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि धर्म की मौलिकता को सुरक्षित रखते हुए समय के अनुरूप बदलाव करना जरूरी है। धार्मिक आयोजनों की भव्यता तभी सार्थक है, जब उसके साथ भीतरी धार्मिकता, आध्यात्मिक चेतना और धर्म के मूल सिद्धांतों के प्रति श्रद्धा भी मजबूत हो। केवल बाहरी आकर्षण से धर्म की प्रभावना नहीं होती, बल्कि लोगों के जीवन में सदाचार, त्याग, संयम और वीतरागता के गुणों का विकास होना चाहिए। बदलते समय के साथ धर्म की प्रस्तुति और व्यवस्थाओं में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन आधुनिकता के नाम पर धर्म के मूल स्वरूप से समझौता नहीं होना चाहिए। बताया जाता है कि शरद पूर्णिमा के अवसर पर मधुबन स्थित गुणायतन में साधनारत मुनि प्रमाण सागर जी महाराज के सानिध्य...