गिरडीह, अगस्त 22 -- Gridih News: बेंगाबाद, प्रतिनिधि। बेंगाबाद प्रखंड में रेशम की खेती किसानों के लिए स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। कम लागत और अल्प अवधि में अधिक मुनाफा होने के कारण क्षेत्र के लगभग 4 से 5 हजार किसान इस व्यवसाय से जुड़ चुके हैं और आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। यह भी पढ़ें- जिले में रेशमकीट पालन से किसानों की बढ़ेगे आमदनी, एरी रेशम उत्पादन बढ़ाना प्राथमिकता: निदेशकरेशम की खेती की विशेषताएँ बेंगाबाद अग्र परियोजना विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, रेशम की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मात्र 35 से 45 दिनों में तैयार हो जाती है। रेशम कीट पालन से लेकर कोकुन तैयार होने तक की पूरी प्रक्रिया डेढ़ महीने में पूरी हो जाती है। इस सीमित समय में एक किसान को लगभग 25 से 30 हजार रुपए तक की शुद्ध आमदनी हो जाती है। इसके बाद क...