गिरडीह, अक्टूबर 23 -- Gridih News: बेंगाबाद, प्रतिनिधि। बेंगाबाद प्रखंड के महेशमुंडा-रघैयडीह में होनेवाली लक्खी पूजा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि देश की आजादी के आंदोलन और हिंदू-मुस्लिम एकता की जीवंत कहानी है। 83 साल से यहां दोनों समुदाय के लोग मिल-जुलकर मां लक्खी की पूजा करते आ रहे हैं और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश कर रहे हैं। पूजा का इतिहास सत्याग्रह आंदोलन से जुड़ा हुआ है। मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए संस्थापक यदुनंदन गोस्वामी की पुत्री अधिवक्ता कला सहाय ने बताया कि इस पूजा की स्थापना आजादी से पहले वर्ष 1942 में हुई थी। उस समय महात्मा गांधी का सत्याग्रह आंदोलन चरम पर था, जिसका मुख्य मकसद हिंदू-मुस्लिम को एक सूत्र में बांधना था। इसी मकसद को धरातल पर उतारने के लिए महेशमुंडा के यदुनंदन गोस्वामी, मंडाटांड़ के अयूब ...