गिरडीह, अक्टूबर 25 -- पर्व-त्योहारों का बदलता स्वरूप Gridih News: झारखंडधाम, प्रतिनिधि। पर्व-त्योहार कभी श्रद्धा, आस्था, उल्लास और सामाजिक समरसता के प्रतीक हुआ करते थे। त्योहारों का नाम सुनते ही लोगों के मन में उमंग की लहर दौड़ जाती थी। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इन खास दिनों का बेसब्री से इंतजार करते थे। लेकिन समय के साथ त्योहारों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक रीति-रिवाजों की जगह दिखावा बढ़ता जा रहा है। भक्ति गीतों और शास्त्रीय संगीत की जगह डीजे का कानफोड़ू शोर सुनाई दे रहा है। उत्सव का उल्लास कहीं-कहीं नशे और तामसिक प्रवृत्तियों की भेंट चढ़ रहा है। पहले त्योहार केवल आयोजन नहीं, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा भरनेवाले अवसर होते थे। लोग कई दिन पहले से तैयारियों में जुट जाते थे। घर-आंगन से लेकर मंदिरों तक उत्सव का व...