गिरडीह, अक्टूबर 29 -- Gridih News: पीरटांड़, प्रतिनिधि। जीवन को सफल, सार्थक और शांतिपूर्ण बनाने के लिए विवेक, आत्मशुद्धि, अहिंसा और संयम का होना आवश्यक है। कब बोलना है, कितना बोलना है, क्या बोलना है और कब मौन रहना है यह समझ जरूरी है। अनुभव, सत्संग, स्वाध्याय और नियमित भावना योग से विवेक जागृत होता है। वहीं, प्रकृति के नियमों को स्वीकार करना, आत्मशुद्धि के लिए निरंतर पुरुषार्थ करना तथा सभी जीवों के प्रति करुणा रखना आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। उक्त बातें राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने गुणायतन में आयोजित शंका समाधान कार्यक्रम में कही। गुणायतन में साधनारत मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने बुधवार को आयोजित प्रवचन सभा में आत्मशुद्धि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मा को पूरी तरह अशुद्ध मानना उचित नहीं है और न ह...