गिरडीह, सितम्बर 25 -- Gridih News: पीरटांड़, प्रतिनिधि। दशलक्षण महापर्व के समापन अवसर पर राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने श्रद्धालुओं से दस दिनों की धर्मसाधना का आत्मलेखा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धर्म का वास्तविक लाभ तभी है, जब उसका प्रभाव व्यक्ति के विचार, व्यवहार, संबंध और जीवनशैली में दिखाई दे। दस दिनों में हमने क्या सीखा, क्या बदला और अभी किस कमी पर काम करना है, इसका ईमानदारी से आंकलन करना चाहिए। अपनी कमजोर कड़ी पहचान लेना ही सुधार की यात्रा का पहला कदम है। यह भी पढ़ें- Shamli News: दशलक्षण महापर्व के दसवें दिन हुई उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधनाउत्तम ब्रह्मचर्य धर्म दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का पालन किया गया। विभिन्न जिनालयों में विशेष पूजा अभिषेक व धर्मसाधना किया गया। उत्तम ब्रह्मचर्य क...