गिरडीह, जुलाई 18 -- Gridih News: शुभम सौरभ,जमुआ। जमुआ प्रखंड के 42 पंचायतों में पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह से वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। धरातल पर आलम यह है कि जनता द्वारा चुनकर भेजे गए प्रतिनिधि सिर्फ कागजों और नाम के हकदार रह गए हैं, जबकि उनका पूरा कामकाज, पावर और दफ्तरों की कमान उनके पति या रसूखदार रिश्तेदार संभाल रहे हैं। स्थानीय प्रशासन की कथित अंदरूनी साठगांठ और मौन सहमति के कारण यह अवैध और गैर- संवैधानिक खेल धड़ल्ले से जारी है, जिससे आम जनता त्रस्त हो चुकी है।

दफ्तरों में पति' और रिश्तेदारों का कब्जा चुनाव जीतकर आईं महिला या अन्य जनप्रतिनिधि अपने घरों में बैठने को मजबूर हैं, जबकि प्रखंड कार्यालय से लेकर पंचायत स्तर की बैठकों और दफ्तरों में उनके रिश्तेदार ही सारे फैसले ले रहे हैं। बिना किसी आधिकारिक पद के, ये लोग सरकारी व्यवस्था ...