गोपालगंज, जुलाई 9 -- Gopalganj News: गोपालगंज।कभी खेतों को सींचने, भूजल को रिचार्ज करने और जैव विविधता को संजोने वाली गोपालगंज जिले की छोटी-बड़ी नदियां आज गाद, अतिक्रमण और उपेक्षा की शिकार होकर दम तोड़ रही हैं। दाहा, स्याही, सोना, घोघारी, धमई और धनखड़ जैसी नदियों के साथ गंडक से निकलने वाली अधिकांश छाड़नें अब बरसात के कुछ दिनों को छोड़ लगभग सूखी रहती हैं। इसका असर केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती की लागत, भूजल स्तर, पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई देने लगा है। यह भी पढ़ें- Ara News: नदियों का अतिक्रमण कर खेत-खलिहान के साथ मकान और दुकान का निर्माणनदियों की स्थिति विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों में लगातार गाद भरने और झाड़ झंखाड़ उगने से जल धारण क्षमता घट गई है। दूसरी ओर अतिक्रमण ने प्राकृतिक जल प्रवाह रोक दिया है। पहल...