गोंडा, अक्टूबर 15 -- Gonda News: रुपईडीह, संवाददाता। अहंकार एवं क्रोध करने से मनुष्य के जीवन में अशांत उत्पन्न होती है। विनम्रता, प्रेम और सदाचार से समाज में सद्भावना होती है। जो भगवान के चित में रहता है उसकी चिंता दूर होती है। व्यक्ति को विपरीत परिस्थित में भी धैर्य और विश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए जिससे उसे लक्ष्य के प्राप्त होती है। यह बातें कथा व्यास आचार्य डॉ श्याम सुंदर पाराशर ने श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन श्रोताओं से कथा के दौरान कहीं। क्षेत्र के ग्राम पंचायत नैन कटौली चौराहा पर स्थित अंजावलिपुर धाम बाबा फलाहारी कुट्टी में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन राजा उत्तानपाद व उनकी रानियों सुरुचि और सुनीति तथा भक्त ध्रुव के चरित्र तथा दक्ष की कथा का मार्मिक वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, धैर्य, त्याग, ...