गोड्डा, जुलाई 5 -- Godda News: गोड्डा एक प्रतिनिधि। गोड्डा की जीवनदायिनी कझिया और गेरुवा नदी का स्वरूप लगातार बदलता जा रहा है। वर्षों से जारी अवैध बालू खनन के वजह से इन नदियों में प्राकृतिक रूप से जमा होने वाला बालू लगभग समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गया है। इसका सीधा असर नदियों की पानी रोकने की क्षमता, ग्राउन्ड वाटर रिचार्ज और पर्यावरण पर दिखाई देने लगा है। कभी कल कल बहने वाली इन नदियों के कई हिस्सों में अब पानी की जगह मिट्टी के ढेर और गहरे गड्ढे नजर आते हैं। वर्तमान में एनजीटी के निर्देशों के कारण खुले आम बालू का उठाव पहले की तरह नहीं हो रहा है। चोरी छिपे अवैध कारोबार जारी है। कई जगहों में साइकिल, फटफटिया और छोटे वाहनों के माध्यम से बालू की ढुलाई की जा रही है। गेरुवा नदी बिहार और झारखंड की सीमा से होकर गुजरती है। सीमा क्षेत्र होने का ...