गोड्डा, जुलाई 31 -- Godda News: गोड्डा, एक प्रतिनिधि। कभी शहर की पहचान और लोगों की जीवनरेखा रही कझिया नदी आज उपेक्षा और प्रदूषण का शिकार बन चुकी है। शहर से निकलने वाले कचरे का अंतिम ठिकाना अब यह नदी बन गई है। वर्ष में केवल एक बार छठ महापर्व से पहले घाटों की साफ सफाई होती है, लेकिन इसके बाद पूरे साल नदी में लगातार कचरा फेंका जाता है। इससे नदी का अस्तित्व संकट में पड़ गया है और इसका पानी भी तेजी से प्रदूषित होता जा रहा है।

स्थानीय स्थिति शहर के विभिन्न मोहल्लों से निकलने वाला घरेलू कचरा, प्लास्टिक, पॉलीथिन, सड़े गले खाद्य पदार्थ, पूजा-पाठ के बाद बचा हुआ अवशेष, मरे हुए पशु तथा अन्य अपशिष्ट खुलेआम नदी में फेंके जा रहे हैं। कई स्थानों पर मेडिकल कचरा, दवाइयों की शीशियां, सिरिंज, एक्सपायरी दवाएं और विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थ भी नदी में प...