गुमला, अक्टूबर 25 -- Ghumla News: कामडारा, प्रतिनिधि। कामडारा प्रखंड में खेतों में रासायनिक खाद के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ठंड के मौसम में मिलने वाली कई प्रजातियों की छोटी मछलियां अब धीरे-धीरे गायब होती जा रही हैं। कभी प्रखंड के हाट-बाजारों में गेतू, पोठी, जिया, मुगरी, गईरसा, चेंगईर और सिंघी जैसी मछलियां आसानी से मिल जाती थीं। दशकों पहले ठंड के मौसम में खेतों और डोभा में जमा पानी से ग्रामीण, बच्चे और युवक पारंपरिक तरीकों से इन मछलियों को पकड़ते थे। स्वादिष्ट होने के कारण इनकी बाजार में काफी मांग रहती थी। उस समय ये मछलियां 10 से 20 रुपये खेजा की दर से मिल जाती थीं। लेकिन अब इनकी उपलब्धता काफी कम हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार, जैविक खाद की जगह रासायनिक खाद के बढ़ते इस्तेमाल से खेतों में छोटी मछलियों का अस्तित्व प्रभावित हुआ है। कभी-कभार बाजार...