गुमला, अक्टूबर 17 -- Ghumla News: चैनपुर प्रतिनिधि कभी लालटेन और ढिबरी की टिमटिमाती रोशनी में मां दुर्गा की आराधना होती थी। आज रंग-बिरंगी लाइटों और भव्य पंडालों से चैनपुर जगमगा उठता है। वर्ष 1958 में स्थानीय लोगों की पहल से शुरू हुई दुर्गापूजा ने समय के साथ लंबा सफर तय किया है। संसाधनों की कमी से शुरू हुई यह परंपरा आज धार्मिक आस्था, जनसहयोग और बदलते दौर के संगम की पहचान बन गई है।शुरुआती दिनों में बिजली और पक्के मंदिर की सुविधा नहीं थी। मां की तस्वीर रखकर सप्तमी से दशमी तक पूजा-अर्चना की जाती थी। इस परंपरा की नींव रखने वालों में पं. काशीनाथ पंडित, रामयाद साव, शिवचरण प्रसाद, कारू राम, बुधराम भगत, सीटू, भगन साव, बैगा और सोहन बैगा शामिल थे। यह भी पढ़ें- Biharsharif News: शेखपुरा : चांदनी चौक पर अक्षरधाम मंदिर में भक्तों को दर्शन देंगी मां अम्...