गया, जून 26 -- Gaya News आधुनिक दौर में मशीनों से बने सस्ते सामान और बदलती बाजार व्यवस्था ने कई पारंपरिक कारीगरों की आजीविका पर गहरा असर डाला है। गया शहर के डेल्हा, रमना, विनोबा नगर, कलेर, भूसंडा और गांधी नगर की स्लम बस्तियों में रहने वाले अनेक परिवार आज भी अपने खानदानी हुनर के सहारे जीवनयापन करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि इस पारंपरिक काम से परिवार का खर्च चलाना अब मुश्किल हो गया है, जिसके कारण उन्हें मजदूरी, रिक्शा चलाने, ठेला लगाने और अन्य छोटे-मोटे रोजगार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। डेल्हा और रमना स्लम बस्ती के लोगों का धंधा हुआ मंदा

स्लम बस्तियों के पारंपरिक व्यवसाय डेल्हा स्लम बस्तियों के लोग वर्षों से रस्सी बंटने, झाड़ू बनाने का काम कर रहे है। रमना स्लम बस्ती के कुछ परिवार बांस की टोकरी, सूप, डलिया और अन्य घरेलू उपयोग की ...