गया, सितम्बर 7 -- Gaya News: वजीरगंज प्रखंड मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दक्षिण फतेहपुर मुख्य सड़क के किनारे स्थित केनार गांव कभी कांसा-पीतल के बर्तनों के निर्माण और कारोबार के लिए दूर-दूर तक जाना जाता था। गांव में दिन-रात बर्तन बनाने की आवाज गूंजती थी। कभी यहां करीब 100 घरों में कांसा-पीतल के बर्तन तैयार होते थे और यहां के निर्मित बर्तन कोलकाता, मुंबई समेत देश के कई राज्यों तक भेजे जाते थे। लेकिन, बदलते बाजार, बढ़ती लागत और पूंजी के अभाव में यह पारंपरिक उद्योग अब धीरे-धीरे दम तोड़ रहा है। कसेरा समाज के पंकज कुमार, बिहारी कसेरा, सरजू कसेरा, अर्जुन कसेरा, रामदेव कसेरा, रामबाबू कसेरा, धनपत कसेरा, बालमुकुंद कसेरा, चिंटू कुमार, कंचन देवी, नूतन देवी समेत अन्य कारीगरों ने बताया कि पहले गांव में बड़े पैमाने पर कांसा-पीतल के बर्तनों का निर्माण ...