गया, अक्टूबर 8 -- Gaya News: मगध विश्वविद्यालय और दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित छह दिवसीय संकाय संवर्धन कार्यक्रम के चौथे दिन गुरुवार को शोध पद्धति और साहित्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर चर्चा हुई। 'डिजिटल टूल्स एंड एआई इन रिसर्च मेथोडोलॉजी' विषयक कार्यक्रम में चार सत्र हुए। विशेषज्ञों ने सांख्यिकीय विश्लेषण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी दी। पहले सत्र में एनआईईपीए के नेशनल फेलो व एनसीटीई के पूर्व अध्यक्ष प्रो. संतोष पांडा ने शोध प्रस्ताव निर्माण की बारीकियां समझाईं। उन्होंने कहा कि शोध समस्या, क्षेत्र और लक्षित समुदाय की स्पष्ट पहचान जरूरी है। प्रामाणिक स्रोतों के उपयोग के साथ शोध की अवधारणात्मक स्पष्टता बनाए रखना भी आवश्यक है। यह भी पढ़ें- एआई शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि ए...