नई दिल्ली, दिसम्बर 10 -- Garuda Purana: जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु है। सनातन धर्म में यह मान्यता है कि मृत्यु के बाद आत्मा अपने कर्मों के अनुसार स्वर्ग या नर्क जाती है। हर व्यक्ति अपने जीवनकाल में यही कोशिश करता है कि वह इतने पुण्य कमाए कि उसे नर्क का कष्ट न भोगना पड़े। लेकिन, क्या सिर्फ दान-पुण्य से ही स्वर्ग की गारंटी मिल जाती है? धार्मिक ग्रंथों में सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले गरुड़ पुराण में मृत्यु और उसके बाद की आत्मा की यात्रा का विस्तार से वर्णन किया गया है। यह पुराण भगवान विष्णु और पक्षीराज गरुड़ के बीच हुए संवाद पर आधारित है। गरुड़ पुराण के नौवें अध्याय में भगवान विष्णु ने स्वयं पक्षीराज गरुड़ को एक ऐसा विशेष उपाय बताया है, जिससे व्यक्ति को अपने कर्मों के अच्छे-बुरे फल भोगने से पहले ही, मृत्यु के समय कुछ विशेष चीजें पास होने पर...