नई दिल्ली, मई 3 -- हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार को 16 संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, विधि-विधान से किया गया अंतिम संस्कार और पिंडदान ही मृत आत्मा को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाकर पितृ लोक पहुंचाता है और अंततः मोक्ष प्रदान करता है। आमतौर पर यह कार्य पुत्र द्वारा किया जाता है, लेकिन शास्त्रों में पुत्र के ना होने पर कई अन्य विकल्प भी दिए गए हैं।अंतिम संस्कार का शास्त्रीय महत्व गरुड़ पुराण में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अंतिम संस्कार से आत्मा को शांति मिलती है और वह आगे के यात्रा पर निकल पाती है। यदि अंतिम संस्कार सही ढंग से ना हो, तो आत्मा प्रेत योनि में भटक सकती है। इसलिए शास्त्र इस कार्य को बहुत गंभीरता से लेते हैं और परिवार के सदस्यों को इसमें कोई भी कमी ना छोड़ने की सलाह देते हैं।पुत्र ना होने पर कौन कर स...