नई दिल्ली, मई 22 -- हिंदू धर्म में पिंडदान और श्राद्ध को पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए बेहद जरूरी माना गया है। गरुड़ पुराण में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा सूक्ष्म शरीर में रहती है और उसे तृप्ति पिंडदान तथा श्राद्ध से ही मिलती है। यदि परिजन इन कर्मों को नहीं करते हैं, तो आत्मा को भारी कष्ट झेलना पड़ता है और इसका असर जीवित परिवार पर भी पड़ता है।आत्मा को भूख-प्यास की पीड़ा गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा भौतिक शरीर छोड़कर सूक्ष्म रूप में चली जाती है। इस अवस्था में उसे सामान्य भोजन नहीं मिलता है। पिंडदान और तर्पण से ही उसे तृप्ति मिलती है। यदि ये कर्म नहीं किए जाएं, तो आत्मा को निरंतर भूख और प्यास की पीड़ा सहनी पड़ती है। वह बेचैन होकर इधर-उधर भटकती रहती है। गरुड़ पुराण में इसे बहुत दुखद स्थिति बताया गया है...