गढ़वा, अक्टूबर 16 -- Garhwa News: गढ़वा, प्रतिनिधि। प्राचीन काल में स्वयंवर कन्या द्वारा योग्य वर चुनने की श्रेष्ठ परंपरा थी। राजा जनक ने माता सीता के विवाह के लिए योग्य, साहसी और वीर वर की तलाश में धनुष यज्ञ का आयोजन किया था। उसमें शर्त रखी गई थी कि जो भगवान शिव के धनुष को तोड़ेगा, सीता उसी के गले में वरमाला डालेंगी। उक्त बातें गायत्री परिवार के विनोद पाठक ने गुरुवार की शाम गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में आयोजित रामकथा के दौरान कहीं। धनुष यज्ञ प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि राजा जनक की इस शर्त ने तत्कालीन राजाओं के अहंकार को भी तोड़ा। माता सीता के स्वयंवर में प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण मुनि विश्वामित्र के साथ दर्शक के रूप में उपस्थित थे। जब आमंत्रित सभी राजा शिव धनुष को उठाने और तोड़ने में असफल रहे, तब विश्वामित्र के आदेश पर श्र...