गंगापार, अक्टूबर 26 -- Gangapar News: सिकंदरा, हिन्दुस्तान संवाद। रामलीला महोत्सव समिति तुलापुर के मंच पर चतुर्थ दिवस को धनुष-भंग और सीता-स्वयंवर की दिव्य लीला मंचित हुई। मिथिला दरबार में जनक की प्रतिज्ञा गूंज रही थी-जो इस शिव-धनुष को तोड़ेगा, वही जानकी का वरण करेगा। देश-देश के भूपति आए। रावण और बाणासुर जैसे पराक्रमी भी आए, जिन्होंने पर्वत उठाए थे, पर वे धनुष को तिल भर भी हिला न सके। वे लज्जित होकर लौट गए। तब जनक व्यथित होकर बोले -वीर विहीन मही मैं जानी। यह वचन सुन लक्ष्मण का अधर फड़क उठा, पर राम की मर्यादित आंखों ने उन्हें शांत किया।गुरु विश्वामित्र ने मंद मुस्कान के साथ राम की ओर देखा और कहा-उठहु राम भंजहु भवचापा। यह भी पढ़ें- Ghazipur News: सीता स्वयंवर में श्रीराम ने भंग किया शिव धनुष, गूंजा जय श्रीराम जैसे ही गुरु की आज्ञा मिली, श्री...