गंगापार, अक्टूबर 22 -- Gangapar News: कौंधियारा/करछना, हिसं। दीपावली को एक पखवारे हैं लेकिन कुम्हार दियाली बनाने के लिए कुनबे के साथ रात दिन जुटे हैं। हालांकि कुम्हारों का कहना है कि अब इस पारंपरिक दीये की मांग कम है। इसकी जगह बिजली की झालरों ने ले लिया है। बताया कि पहले हर घर दियाली पहुंचा दी जाती थी, अब तो खरीदारों की राह देखनी पड़ती है।करछना के बसरिया, कैथी और रोकड़ी गांवों में आज भी कुछ परिवार यह परंपरा जीवित है। कैथी के कुम्हार बस्ती निवासी शंखधर प्रजापति और संतलाल प्रजापति हजारों दीये बना चुके हैं। उनका कहना है कि अच्छी मिट्टी की कमी, बर्तनों को पकाने में ईंधन का खर्च और बाजार में खरीदारों का अभाव उनकी परेशानी बढ़ा रहा है। तैयार दीये बेचने के लिए उन्हें गांव-गांव घूमना पड़ता है। कम आमदनी के कारण नई पीढ़ी इस पुश्तैनी काम से दूर होकर ...