नई दिल्ली, अप्रैल 21 -- वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 23 अप्रैल को गंगा ने शिव की जटाओं से पृथ्वी की ओर अपनी यात्रा आरंभ की थी और गंगा दशहरा के दिन गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। 'गंगा सप्तमी' के दिन गंगा स्नान करने से मनुष्यों को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। कैसे ऋषि ने गंगा को दंड दिया एक पौराणिक कथा के अनुसार जब गंगा शिव की जटाओं से पृथ्वी की ओर निकली, तो उनके प्रचंड वेग से पृथ्वी पर उथल-पुथल मच गई। इसी क्रम में गंगा ने ऋषि 'जाहनु' के आश्रम को भी तहस-नहस कर दिया और उनकी तपस्या भंग कर दी। इससे क्रोधित होकर ऋषि ने गंगा को दंड देते हुए उसके समस्त जल को पी लिया। यह देखकर देवताओं ने ऋषि से गंगा को मुक्त करने की प्रार्थना की ताकि वे राजा भगीरथ के पूर्वजों की आत्माओं को मुक्ति प्रदान कर सकें। ऋषि जाहनु ने देवताओं की विनती पर गंगा...
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