नई दिल्ली, मई 30 -- भगवान गणेश के वाहन मूषक (चूहे) की कहानी हिंदू पुराणों में बहुत रोचक और शिक्षाप्रद है। यह कथा केवल एक असुर के परिवर्तन की नहीं, बल्कि अहंकार के नाश और भक्ति की जीत की भी मिसाल है। गजमुख नामक शक्तिशाली असुर से शुरू हुई यह कहानी अंत में गणेश जी के प्रिय वाहन के रूप में समाप्त होती है।गजमुख असुर की तपस्या और वरदान पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में गजमुख नाम का एक शक्तिशाली असुर था। वह राजा था, लेकिन उसकी महत्वाकांक्षा बहुत बड़ी थी। वह और अधिक शक्ति, धन और देवताओं पर विजय चाहता था। इस उद्देश्य से उसने अपना राज्य त्याग दिया और गहन जंगलों में जाकर भगवान शिव की कठोर तपस्या शुरू कर दी। वर्षों तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए तप करने के बाद भगवान शिव प्रसन्न हुए और उसे दिव्य शक्तियां प्रदान कीं। शिवजी ने यह भी वरदान दिया कि कोई ...