फिरोजाबाद, जुलाई 11 -- Firozabad News: 17 वर्षीय दीपमाला। अपने परिवार की बड़ी बेटी होने के कारण सबकी लाड़ली थी। इसकी वजह भी थी कि उसका ज्यादा वक्त पढ़ाई में ही गुजरता था। कुछ कर गुजरने की दीपमाला की तमन्ना का प्रमाण उसके कमरे से मिलता है, जिसमें प्रवेश करते ही नजर आती है सफल होने वाले पुरुषों की तस्वीरें, जिन्हें देख दीपमाला हर रोज इंजीनियर बनने के बाद देश के लिए कुछ कर गुजरने के दीप जलाया करती थी तो परिजन बेटी को हर वक्त पढ़ाई में देख कई उम्मीदें पाले हुए थे, लेकिन शुक्रवार को पड़े साइलेंट अटैक के साथ दीपमाला की आंखें बंद हुई तो बेटी की मौत से परिजनों के आंसू भी थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

दीपमाला के परिजन बसई मोहम्मदपुर के शंकरपुर में रहने वाली दीपमाला अपने पिता संजय कुमार को अपनी प्रेरणा मानती थी। संजय कुमार गढ़िया चकरपुर में शिक्षक ह...